साहित्य जगत में एक पुराना एवं जाना पहचाना नाम प्रेम सक्सेना !
अपन्स शबाब पर अनेखों कवि सम्ममेलनों एवं मुशायरों में शिरकत !
तकनीक एवं अभियांत्रिकीय वातावरण भी अपनी रचना धर्मिता की नजाकत को बरक़रार रखना प्रेम सक्सेना के बूते की ही बात हे
देश के गणमान्य कवियों के साथ साथ प्रदेश के एवं भोपाल के दिग्गज कवियों एवं शायरों के साथ कविता पाठ !
लगभग ७० वर्षों की शारीरिक उम्र के बावजूद आज भी उतने ही तरो ताज़ा और उतना ही तरो ताज़ा लेखन भी !
मौसम ,प्रकृति और आम आदमी की बात कहती हुई उनकी गज़लें कंही गहराई से सूफियाना अंदाज़ भी बयां होती हैं !
यहाँ प्रस्तुत हैं उनकी चुनिन्दा गज़लें .......
Custom Search
Wednesday, November 12, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment